रवींद्रनाथ टैगोर को आजादी से पहले साल 1913 में साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार मिला था. उन्हें उनकी प्रसिद्ध रचना गीताजंलि के लिए ये पुरस्कार मिला था.

अंग्रेज भी उनकी प्रतिभा के कायल थे इसलिए उन्हें ब्रिटिश शासन द्वारा नाइट हुड की उपाधि दी गई थी. ये उनके लिए एक बड़ा सम्मान था लेकिन 104 साल पहले आज ही के दिन 30 मई 1919 को उन्होंने ये उपाधि वापस लौटा दी थी. 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार के विरोध में उन्होंने ये फैसला लिया.

टैगोर ने वायसराय चेम्सफोर्ड को पत्र लिखकर उन्हें ब्रिटिश सम्राट द्वारा दी गई ‘नाइट हुड’ की उपाधि छोड़ने का ऐलान किया. बता दें कि साल 1915 में उन्हें ‘नाइट हुड’ की उपाधि से नवाजा गया. उनकी इस घोषणा से अंग्रेजी हुकुमत बौखला गई थी. उन्होंने इसे अपने सम्राट का अपमान बताया. बता दें कि जिस भी व्यक्ति को ब्रिटिश हुकुमत नाइट हुड की उपाधि देती थी. उसके नाम के साथ सर लगाया जाता था.

जलियावाला बाग में हुआ था नरसंहार

13 अप्रैल साल 1919 की बैसाशी के पर्व पर अमृतसर के जलियांवाला बाग में अग्रजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक सभा बुलाई गई थी. इस सभा में हजारों लोग पहुंचे थे. यहां कुछ लोग अपने परिवार के साथ बैसाखी का मेला देखने भी आए थे. इसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. जनरल डायर ने जनसभा में हजारों की भीड़ देखकर बौखला गया और उसने अपनी फौज को फायरिंग का आदेश दे दिया. उसके आदेश पर 10 मिनट तक फौज ने 1650 राउंड गोलियां बरसाईं. इस नरसंहार में आधिकारिक तौर पर 379 लोग मारे गए थे. लेकिन अनौपचारिक आंकड़ों में ये संख्या 1000 से ज्यादा बताई जाती है. लगभग 2000 से अधिक भारतीय इस फायरिंग में घायल हुए थे.

टैगोर ने दो देशों के राष्ट्रगान लिखे हैं

रवींद्रनाथ टैगौर की बात करें तो वो दुनिया के ऐसे एकमात्र कवि हैं जिन्होंने दो देशों के राष्ट्रगान लिखे हैं. उन्होंने भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अलावा बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी लिखा है. वहीं श्रीलंका के राष्ट्रगान में उनकी छाप नजर आती है. 7 मई, 1861 को जन्में टैगौर ने 1907 से 1910 के बीच गीतांजलि की कविताएं लिखीं थी. इसका अंग्रेजी अनुवाद पूरी दुनिया में काफी फेमस हुआ.

टैगोर ने गांधी को राष्ट्रपिता नाम दिया

टैगोर और राष्ट्रपति महात्मा गांधी की बात करें तो दोनों एक ही दशक में पैदा हुए थे. टैगोर का जन्म के आठ साल बाद 1969 में गांधी का जन्म हुआ था. टैगौर वो शख्स थे जिन्होंने गांधी को राष्ट्रपिता नाम दिया था. दोनों के बीच एक दूसरे के लिए कितना सम्मान था इसका पता इससे चलता है कि जब अक्टूबर 1937 में जब टैगोर एक मेडिकल जांच के लिए कलकत्ता के बाहरी इलाके में रुके तो गांधी उनसे मिलने कार से निकले थे.

लेकिन रास्ते में गांधी बेहोश हो गए. इस बात की खबर मिलते ही टैगोर को देखने के लिए काफी व्याकुल हो उठे. इसके बाद गांधी से मिलाने के लिए उन्हें कुर्सी पर बैठाकर शरद चंद्र बोस के मकान की ऊपरी मंजिल पर चढ़ाया गया, जहां गांधी को रखा गया था. रवींद्रनाथ टैगोर का निधन लंबी बीमारी के बाद 7 अगस्त, 1941 को हुआ.

By Ajay Thakur

Ajay Thakur, a visionary journalist and the driving force behind a groundbreaking news website that is redefining the way we consume and engage with news.