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‘रामायण’ पर बनी पहली हिंदी फिल्म, जिसे जूते-चप्पल उतारकर देखने जाते थे लोग, ‘राम’ ही बने थे ‘सीता’

रामायण : Prabhas और कृति सेनन (Kriti Sanon) स्टारर फिल्म ‘आदिरपुरुष’ (Adipurush) 16 जून को सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। बीते दिन ही इसका ट्रेलर (Adipurush Trailer) वीडियो लॉन्च किया गया.

इसके लॉन्चिंग इवेंट में फिल्म की स्टारकास्ट भी शामिल हुई थी। वीडियो को कुछ खास रिस्पांस तो नहीं मिला था। लोगों ने खूब कमियां निकाली थी। ये ‘रामायण’ (Ramayan) पर आधारित फिल्म है, जिसमें राम-सीता की कहानी को दिखाया गया है। आपको बता दें कि इससे पहले भी कई बार रामायण पर आधारित कई फिल्में बन चुकी हैं। लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि राम-सीता पर आधारित पहली हिंदी फिल्म के बारे में। ये काफी चर्चा में रही थी तो ऐसे में चलिए आपको इस मूवी के बारे में बताते हैं.

रामायण’ पर आधारित फिल्म ‘लंका दहन’ पहली बार बनी थी। इसे दादा साहेब फाल्के ने लिखा और डायरेक्टर किया था। इसमें लीड रोल में अन्ना सालुंके थे, जिन्होंन राम और सीता दोनों का ही रोल प्ले किया था। सिनेमा जगत में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी ने एक ही फिल्म में डबल रोल निभाया था। उन्हें दादा साहेब फाल्के ने ही सीता का भी रोल ऑफर किया था। इसकी वजह थी उनका महिलाओं की तरह पल्लू लेना, नरम हाथ और पतली कमर थी। बताया जाता है कि जब वो महिला के गेटअप में तैयार होकर आते तो उन्हें पहचान पाना भी काफी मुश्किल हो जाता था। वो सीता के रोल में भी काफी परफेक्ट दिखते थे। यहां तक कि सिनेमाघरों में उन्हें देखने के लिए लाइन लग जाती थी। लोग मारने-मरने पर भी उतारू हो जाते थे।

1917 में बनी थी रामायण पर पहली हिंदी फिल्म

‘रामायण’ आधारित फिल्म ‘लंका दहन’ को साल 1917 में बनाया गया था। ये एक मूक (साइलेंट) फिल्म थी, जिसने राम-सीता की गाथा को पर्दे पर दिखाई थी। इसके जरिए पहली बार डबल रोल देखा गया था। इसमें राम-सीता का रोल प्ले करके अन्ना सालुंके ने इतिहास रचा था। उनकी कमाल की एक्टिंग को काफी सराहा गया था। अन्ना के लिए कोई ये पहली बार नहीं था जब उन्होंने महिला का रोल प्ले किया था। वो पहली फिल्म में भी हीरोइन बने थे। उन्होंने पहली भारतीय फिल्म ‘राज हरिश्चंद्र’ में रानी तारामति का रोल प्ले किया था। हालांकि, बताया जाता है कि वो पहले इस रोल के लिए तैयार नहीं थे और जब तैयार हुए तो मूंछे कटवाने को भी तैयार नहीं थे। लेकिन जैसे तैसे दादा साहेब फाल्के ने उन्हें मनाया और उन्हें पहली हीरोइन के तौर पर जाना गया है, जो कि एक पुरुष थे।

अन्ना को देखने के लिए होते थे झगड़े

बताया जाता है कि ‘रामायण’ की कहानी लोगों को खूब पसंद आई थी और उससे ज्यादा अन्ना। इस कहानी को लोगों ने सच ही मान लिया था। रामायण के लिए टिकट खरीदने के लिए लंबी लाइनें लगती थीं। ये इतिहास में ऐसा पहली बार था जब मीलों तक किसी फिल्म के लिए लंबी लाइनें लगी थीं। यहां तक कि कहा जाता है कि लोग थिएटर के बाहर टॉस करते थे कि टिकट किसे मिलेगी। भगदड़ और टिकट की लड़ाई तो आम ही हो गई थी।

सिनेमाघरों को बनाया मंदिर

‘लंका दहन’ रामायण पर बनी पहली ऐसी फिल्म रही है, जिसने सिनेमाघरों को मंदिर तक बनाया दिया था। लोग सिनेमाघरों के बाहर जूते-चप्पल उतारकर जाया करते थे और हाथ जोड़कर बैठा करते थे। मानों वो मंदिर में भगवान की शरण में बैठे हों। रिपोर्ट्स में कहा ये भी जाता है कि महज 10 दिनों के भीतर इस फिल्म ने 35 हजार रुपए कमाए थे और पैसों की थैलियों को भरकर बैलगाड़ियों द्वारा ऑफिस पहुंचाया जाता था। कहा जाता है कि ये मुंबई के सिनेमाघरों में 23 हफ्तों तक लगी रही

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